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Showing posts from April, 2024

झारखंड की अर्थव्यवस्था

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झारखंड की राजधानी रांची , तीव्र गति से बढ़ रही है और विस्तार कर रही है। वृद्धि हुई आर्थिक गतिविधियों और बुनियादी ढांचे के विकास के कारण व्यापक शहरीकरण हुआ है, इसके परिणाम स्वरुप शहरी और अर्ध शहरी क्षेत्र का विस्तार हो रहा है। भूमि उपयोग नीतियों में बदलाव के कारण शहर के आसपास के इलाकों में अधिक क्षेत्रों को जोड़ा जा रहा है। रांची को पूंजी की स्थिति के साथ सम्मानित होने के बाद ,बढ़ती आबादी की आवश्यकताओं को पूरा करने के आवश्यकता है। आसानी से उपलब्धि जनशक्ति प्रति प्रतिष्ठा तकनीकी प्रबंधन और शैक्षिक संस्थानों अच्छी परिवहन और संचार सुविधाएं और बिजली की स्थिति में सुधार उद्यमियों के लिए आर आइए(रांची औद्योगिक क्षेत्र) क्षेत्र आकर्षक बनाता है लोगों के लाभ के लिए पर्याप्त रोजगार, ढांचागत और संस्थागत सुविधाओं को उत्पन्न करने के प्रयास किया जा रहे हैं। शहरीकरण के इस युग में औद्योगिक करण और आधुनिक की कारण वर्तमान पर्यावरण को संरक्षित और संरक्षित करने के लिए नहीं भूलना चाहिए। रांची शहर के लिए एक सतत और पर्यावरण अनुकूल विकास का तरीका आवश्यक है। रांची में व्यापार वाणिज्य और व्यापार झारखंड की राजधानी...

भारत के कुछ रहस्मय मंदिर/ एक बार जरूर पढ़े

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  बाबा टांगीनाथ धाम: डुमरी गुमला झारखंड के प्राकृतिक सौंदर्य के बीच बाबा टांगीनाथ धाम पहाड़ी पर स्थित है बाबा टांगीनाथ धाम सेव स्थल होने के साथ साथ सक्ति तथा सूर्य एवं वैष्णव धर्म समूह के प्राचीन मूर्तियां देखने को मिलती है इनके साथ यहां का विशेष आकर्षण अद्भुत अद्वितीय अच्छे त्रिशूल जो कि खुले आकाश के नीचे लगभग चौथी से छठी शताब्दी के आसपास से यहां पर बिना जंग के खुले आसमान के नीचे अपना सीना तान खड़ी है यहां महाशिवरात्रि तथा  श्रवण मास कार्तिक पूर्णिमा में हजारों लाखों श्रद्धालु एवं भक्ति पूजा के लिए आते हैं।  वेदनाथ धाम देवघर : देवघर में हर साल सावन के महीने में और महाशिवरात्रि में लाखों श्रद्धालु भगवान शिवलिंग को जल अर्पित करने को कई राज्यों से आते हैं। वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग स्थित होने के कारण इस स्थान को देखकर नाम मिला है। वासुकी नाथ मंदिर , दुमका: देवघर के शिवालय के अलावा हिंदू श्रद्धालु इसके दर्शन के लिए भी आते हैं वेदनाथ मंदिर की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक दुमका जिले के वासुकी नाथ मंदिर में दर्शन नहीं किए जाते। रजरप्पा का छिन्मस्तिका मंदिर: इसे  देश ...

एक साथ जारी होगा इंटर तीनो संकाय का रिजल्ट

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रांची इंटरमीडिएट परीक्षा 2024 के तीनो संकाय का रिजल्ट एक साथ जारी होगा. झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने रिज़ल्ट जारी करने की तयारी शुरू कर दी है. पहले इंटर साइंस व कॉमर्स संकाय के रिजल्ट जारी करने की तयारी थी. अब सभी संकाय का रिजल्ट एक साथ जारी किया जाएगा रिजल्ट 30 अप्रैल को जारी हो सकता है. खबरों के मुताबिक JAC 12वीं रिजल्ट 2024 की घोषणा 30 अप्रैल तक कर दी जाएगी। ऐसे में स्टूडेंट्स अपने परिणाम (Jharkhand Board JAC 12th Result 2024) जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट, jac.jharkhand.gov.in और रिजल्ट पोर्टल, jacresults.com पर देख सकेंगे। झारखंड बोर्ड जेएसी कक्षा 12 विज्ञान, कला और वाणिज्य परिणाम 2024। झारखंड जेएसी 12वीं परिणाम 2024 दिनांक 30 अप्रैल: झारखंड अकादमिक परिषद (जेएसी) विज्ञान, वाणिज्य और कला में 2024 की कक्षा 12 परीक्षाओं के परिणाम जारी करने की संभावना है। मंगलवार, 30 अप्रैल, 2024 को स्ट्रीम ।

झारखंड:छात्र नेता से बने राजनेता जयराम महतो आइए जानते सचाई

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  झारखंड : छात्र नेता से राजनेता बने जयराम महतो, ने बनाई नई पार्टी, लोकसभा व विधानसभा चुनाव में ठोकेंगे ताल  छात्र नेता से राजनेता बने जयराम महतो ने नई राजनीतिक पार्टी बनाई है. इस पार्टी का नाम झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति और चिह्न टाइगर रखा है. इस पार्टी के अध्यक्ष बने जयराम ने राज्य के सभी लोकसभा और विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ने का ऐलान भी किया.  छात्र नेता जयराम महतो ने रविवार को एक नई राजनीतिक पार्टी बनाई है. इस पार्टी का नाम झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति (जेबीकेएसएस) रखा है. वहीं, इस पार्टी का चिह्न टाइगर रखा है. जयराम इस पार्टी के अध्यक्ष बने हैं. नई पार्टी की घोषणा के साथ ही उन्होंने झारखंड के सभी लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान भी किया. साथ ही कहा कि जब तक 1932 का खतियान लागू नहीं हो जाता, तब तक चुपचाप नहीं बैठेंगे. लोकसभा और विधानसभा चुनाव में ताल ठोंकने का ऐलान रविवार, 18 जून 2023 को बलियापुर के हवाई पट्टी मैदान में राज्य स्तरीय अधिवेशन में सर्वसम्मति जेबीकेएसएस गठन का फैसला किया गया. 2024 के लोकसभा एवं विधानसभा की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए सर्...

भागता पर्व क्यू मनाया जाता हैं ?

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भागता पर्व आदिवासियों का परिचायक पर्व है। विशुद्ध आदिवासी संस्कृति का पर्व है। इस पर्व का खास आकर्षण, गायन-नाच होता है जो पंद्रह दिन पूर्व से ही शिव मंदिर के अखड़ा में शुरू हो जाता है। आखिरी रात छाऊ-नाच करके रतजगा किया जाता है। *आदिवासियों का प्रमुख त्योहारों में से एक भागता पर्व भी है। भोक्ता पर्व में भगवान शिव के प्रति अगाध श्रद्धा व भक्ति के समायोजन सहित झारखंडी संस्कृति का समावेश है। यह लोकपर्व झारखंड के ग्रामीण इलाकों में उत्साह पूर्वक मनाने के अलावा निकटवर्ती राज्य पश्चिम बंगाल व उड़ीसा में भी उल्लासपूर्ण वातावरण में मनाया जाता है जिसके साधक को स्थानीय भाषा में भक्तियां कहते हैं। कई स्थानों पर इस पर्व को मंडा पर्व, विशु पर्व, चड़क पर्व, शिव पूजा आदि के नाम से भी जाना जाता है, जो बांग्ला चैत संक्रांति में मनाया जाता है। शिव उपासना का पर्व होने के कारण इसे शिव मंदिरों में मनाने की परंपरा है। इसमें भक्तों की अटूट श्रद्धा भगवान शिव के प्रति रहने के कारण वे सहज ही दहकते अंगारे पर चलने सहित शरीर में नुकीली कील घोंपने के बाद भी मदमस्त रहते हैं। इसमें श्रद्धालु अपनी पीठ में लोहे के हुक घों...