भारत के कुछ रहस्मय मंदिर/ एक बार जरूर पढ़े

 बाबा टांगीनाथ धाम: डुमरी गुमला झारखंड के प्राकृतिक सौंदर्य के बीच बाबा टांगीनाथ धाम पहाड़ी पर स्थित है बाबा टांगीनाथ धाम सेव स्थल होने के साथ साथ सक्ति तथा सूर्य एवं वैष्णव धर्म समूह के प्राचीन मूर्तियां देखने को मिलती है इनके साथ यहां का विशेष आकर्षण अद्भुत अद्वितीय अच्छे त्रिशूल जो कि खुले आकाश के नीचे लगभग चौथी से छठी शताब्दी के आसपास से यहां पर बिना जंग के खुले आसमान के नीचे अपना सीना तान खड़ी है यहां महाशिवरात्रि तथा  श्रवण मास कार्तिक पूर्णिमा में हजारों लाखों श्रद्धालु एवं भक्ति पूजा के लिए आते हैं। 


वेदनाथ धाम देवघर: देवघर में हर साल सावन के महीने में और महाशिवरात्रि में लाखों श्रद्धालु भगवान शिवलिंग को जल अर्पित करने को कई राज्यों से आते हैं। वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग स्थित होने के कारण इस स्थान को देखकर नाम मिला है।

वासुकी नाथ मंदिर , दुमका: देवघर के शिवालय के अलावा हिंदू श्रद्धालु इसके दर्शन के लिए भी आते हैं वेदनाथ मंदिर की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक दुमका जिले के वासुकी नाथ मंदिर में दर्शन नहीं किए जाते।


रजरप्पा का छिन्मस्तिका मंदिर: इसे देश का प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है। 

जगन्नाथ मंदिर और मेला, रांची: उड़ीसा के पुरी जगरनाथ रथ की तरह यहां भी रथ मेला लगता है और मंदिर भी पुरी धाम की अनुकृति है।

 इटखोरी का बौद्ध अवशेष और काली काली मंदिर: इस जगह पर बुद्ध परंपरा के प्राचीन अवशेष है और पास में ही भद्रकाली का भव्य मंदिर है।

पहाड़ी मंदिर, रांची: शहर के मध्य में स्थित शिव का या मंदिर बेहद लोकप्रिय है या भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां तिरंगा झंडा फहराया जाता है। 

सूर्य मंदिर, बुंडू: भगवान सूर्य की आराधना करने के लिए समर्पित यह मंदिर बेहद मनोहारी है।

दिउड़ी मंदिर या दिउड़ी दिरि, तमाड़: यहां 700 वर्ष पुरानी देवी दुर्गा की प्राचीन प्रतिमा है ,जो बहुत से लोगों को आकर्षित करती है यहां आदिवासी और हिंदू संस्कृति का संगम देखा जा सकता है।

पारसनाथ स्थल: श्री समेट शिखर जी तीर्थ स्थल जैनियों का पवित्र स्थल है।

आकर्षिणी पीठ, खरसावां : खरसावां में मां अग्रसेन की महिमा भक्तों को आकर्षित करती है।

रंकिनी मंदिर ,जादूगोड़ा: पहाड़ों और घने जंगलों के बीच स्थित एक प्राचीन धार्मिक स्थल।यहां प्राचीन काल से भूमि आदिवासियों की देवी रंकिणी की पूजा घाटी पर स्थित एक शिला पर होती है ,18वीं शताब्दी में इसके कुछ दूरी पर सड़क किनारे बाद में हिंदुओं द्वारा मंदिर बनाया गया।













Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

Jharkhand:रजरप्पा मां छिन्नमस्तिका मंदिर का इतिहास क्या हैं?