आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है इसकी शुरुआत कैसे हुई?

र्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI)क्या है?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अर्थ है बनावटी (कृत्रिम) तरीके से विकसित की गई बौद्धिक क्षमता (इंटेलेक्चुअल एबिलिटी)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जनक जॉन  मैकार्थी  के अनुसार यह इंटेलिजेंट मशीनों विशेष रूप से इंटेलिजेंट कंप्यूटर प्रोग्राम को बनाने का साइंस और इंजीनियरिंग है अर्थात यह मशीन द्वारा प्रदर्शित की गई इंटेलिजेंस है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंप्यूटर साइंस का एक डिवीजन है और इसकी जड़े पूरी तरह से कंप्यूटिंग सिस्टम पर आधारित है। AI का अंतिम लक्ष्य ऐसे उपकरणों का निर्माण करना है जो बुद्धिमानी से और स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके और ह्यूमन मजदूर और मैन्युअल काम को कम कर सके।












    यह मानव बुद्धि की नकल करने के लिए मशीन लर्निंग का उपयोग करता है Siri, Alexa,Tesla car और डिजिटल एप्लीकेशन जैसे Netflix और amazon AI टेक्नोलॉजी के कुछ बेहतरीन उदाहरण है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग अप्लाइड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ-साथ रोबोटिक और ऑटोमेटिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा के साथ-साथ बैचलर्स की डिग्री और मास्टर डिग्री की पेशकश की जाती है जिससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में करियर बनाने के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की शुरुआत कैसे हुई?


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शुरुआत 1950 के दशक में ही हो गई थी, लेकिन इसको 1970 के दशक में पहचान मिली।
जापान ने सबसे पहले पहल की और 1981 में फिफ्थ जनरेशन नामक योजना की शुरुआत की थी। इसमें सुपर कंप्यूटर के विकास के लिए दसवीं 10 वर्षीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी बाद में ब्रिटेन ने इसके लिए एल्बी नाम का एक प्रोजेक्ट बनाया यूरोपीय संघ के देशों ने भी (एस्प्रिट) नामक एक कार्यक्रम की शुरुआत की थी 1983 में कुछ निजी संस्थाओं ने मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर लागू होने वाली उन्नत तकनीकी जैसे वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेटेड सर्किट का विकास करने के लिए एक संघ माइक्रो इलेक्ट्रो एंड  कंप्यूटर टेक्नोलॉजी की स्थापना की।








आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर पिछले करीब एक साल से चर्चा तेज हो गई है। पिछले साल नवंबर में ओपनएआई के एआई चैटबॉट चैटजीपीटी के आते ही लोगों के बीच एआई शब्द काफी पॉपुलर हो गया। अब टेक मार्केट से लेकर बिजनेस तक और रिसर्चर से लेकर कॉलेज स्टूडेंट तक हर कोई एआई और चैटजीपीटी की बातें कर रहा है। अधिकांश लोगों का मानना है कि यह अगली सफल टेक्नोलॉजी है। पीडब्ल्यूसी के अनुसार, एआई 2030 तक ग्लोबल अर्थव्यवस्था में 15.7 ट्रिलियन डॉलर का योगदान दे सकता है। लेकिन क्या आपको पता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक कितने तरह की होती है? इस रिपोर्ट में हम आपको पांच तरह की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के बारे में बताएंगे। चलिए जानते हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस 5 प्रकार के होते है?


मशीन लर्निंग

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में मशीन लर्निंग एक प्रमुख कंपोनेंट है। आसान शब्दों में कहें तो यह एक ऐसा एल्गोरिथम है, जो डेटा सेट को स्कैन करता है और फिर उनसे एजुकेटेड जजमेंट लेने में मदद लेता है। मशीन लर्निंग के मामले में, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर अपने काम के एक्सपीरियंस से ही सीखते हैं और फिर अपनी परफॉरमेंस में सुधार भी करते हैं। यानी मशीन लर्निंग में कंप्यूटर सॉफ्टवेयर खुद को ही ट्रेंड करता है। चैटजीपीटी और बार्ड जैसे एआई टूल में नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और मशीन लर्निंग का ही इस्तेमाल किया गया है।











डीप लर्निंग

डीप लर्निंग को मशीन लर्निंग का एक सबसेट भी माना जा सकता है। डीप लर्निंग रिप्रेजेंटेटिव लर्निंग के साथ आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क पर आधारित है। डीप लर्निंग में 'डीप' नेटवर्क में गहन लर्निंग को बताता है। यानी इसमें सीखने की क्षमता काफी ज्यादा होती है। आसान शब्दों में कहें तो यह कंप्यूटर को मानव मस्तिष्क से प्रेरित तरीके से डाटा प्रोसेस्ड करना सिखाती है।







       नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (एनएलपी)
नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग यानी एनएलपी भी एक तरह की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है, जो एआई और भाषा विज्ञान को जोड़ती है। इसकी मदद से मनुष्यों को नेचुरल लैंग्वेज का इस्तेमाल करके मशीन और रोबोट के साथ संवाद करने में मदद मिलती है। गूगल वॉइस सर्च, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग का सबसे सरल उदाहरण है।












कंप्यूटर विजन
लागत में कटौती और सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए ऑर्गेनाइजेशन में कंप्यूटर विजन का उपयोग किया जाता है। कंप्यूटर विजन का मार्केट अपनी क्षमताओं के समान दर से बढ़ रहा है और 2025 तक 26.2 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। यह लगभग 30% वार्षिक वृद्धि है। सेल्फ-ड्राइविंग कारों में कंप्यूटर विजन का ही इस्तेमाल किया जाता है।







एक्सप्लेनेबल एआई (xAI)
एक्सप्लेनेबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रणनीतियों और दृष्टिकोणों का एक कलेक्शन है। एक्सप्लेनेबल एआई तकनीक इंसानों को मशीन लर्निंग एल्गोरिदम की खोज करने के साथ-साथ आउटपुट को समझने और उन पर भरोसा करने में मदद करती है। एक्सप्लेनेबल एआई, किसी भी एआई मॉडल के इफेक्ट और किसी भी पूर्वाग्रह को समझाने की क्षमता रखता है। यह मॉडल की शुद्धता, निष्पक्षता और पारदर्शिता की परिभाषा में योगदान देता है और एआई-संचालित निर्णय लेने में मदद करता है।







AI के नुकसान
नौकरियां खत्म होने का खतरा: एआई में पारंपरिक रूप से किए जाने वाले कार्यों को स्वचालित करने की क्षमता है, जिससे कुछ उद्योगों में लोगों की नौकरियां जा सकती हैं और बेरोजगारी पैदा हो सकती है. जैसे- कस्टमर सपोर्ट के लिए बनाए गए चैटबोट अगर 100% सफल होते हैं तो कंपनियां इसके लिए नौकरियां निकालना बंद कर देंगी
                       आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एडवांस होने की वजह से भविष्य की एआई सिस्टम इतनी सक्षम हो सकता है कि वह अपना गहरा असर छोड़ेगा और मानवता के लिए खतरा बनकर उभरेगा. दुनिया के सबसे एडवांस एआई सिस्टम को अमेरिकी डेवलपर्स से चुराया जा सकता है और फिर अमेरिकी हितों के खिलाफ ही इसे हथियार बनाया जा सकता है।

















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